इन बेदर्द सर्दियों में ,
कांपती हाथ की उँगलियों में ...
या बारिशों में कुछ भीगती-सी उस एक छतरी में .... ?
तुम्ही बताओ कहाँ ढुंढ़ू तुम्हें अब इस हाल में ..... ???
दो प्याली चाय की उन तमाम बेपरवाह चुस्कियों में .....
मेरे दिन के हर ख़याल में ,
ज़हन के हर सवाल में , जवाब में भी .... ?
तुम्ही बताओ कहाँ ढुंढ़ू तुम्हें अब इस हाल में ..... ???
कुछ पुरानी तस्वीरों में,
कुछ धुंधलाती हाथ की लकीरों में ..
तन्हाइयों में, बेवक्त आई इन मजबूरियों में .... ?
तुम्ही बताओ कहाँ ढुंढ़ू तुम्हें अब इस हाल में ..... ???
वो हर वक़्त मुझ पर लगे , तेरे पहरे में
तेरे खुद से भी ज्यादा मेरी परवाह करने में ..
या फिर तेरी शिद्दत में खुदा से हुई मेरी बेरुखी में ... ?
तुम्ही बताओ कहाँ ढुंढ़ू तुम्हें अब इस हाल में ..... ???
बेवजह मेरे रूठ जाने में ,
तेरे सौ बहाने कर के मुझे मनाने में,
या अब मेरे बुलाने पे भी तेरे ना आने में .... ?
तुम्ही बताओ कहाँ ढुंढ़ू तुम्हें अब इस हाल में ..... ???
अब ... मेरी उन अकेली सिसकियों में ... :(
शायद तूने याद किया , तो मेरी इन हिचकियों में ...
अब "यादें" बन चुकी, तेरे साथ जो गुजरी उन लमहों, उन घड़ियों में ... ?
तुम्ही बताओ कहाँ ढुंढ़ू तुम्हें ???? :(
:(