Thursday, 15 August 2013

ज़िन्दगी का नशा



" ज़िन्दगी " एक नशा है  …. 

             मुझे     … , " ज़िन्दगी का नशा  "    है  … 

इसलिए    … मुझे किसी और नशे की 
                                               ज़रूरत  नहीं !!! 

Friday, 2 August 2013

'रेहन'






पहले खुद  को  ही  गुम     कर के  … 
अब  खुदी को  ढूंढ़ते   हैं हम  … 


भाव कौड़ी  के ,  'रेहन' पे  गहने दिए 
अब उन्हें ही छुड़ाने  चले हैं हम ! 

 

Thursday, 1 August 2013

woh --merii -- maaa -- THI--

woh --merii -- maaa -- THI--

jo meri jeevan dhaara thi ,
jo pehla pyaar hamara thi ...


har pal  khayal toh vo mera , mujhse bhi jyada rakhti thi
har shaam mere ghar aane tak , chaukhat taakti rehti thi...


meri khushiyan -- mere sapnon ka , haal usey sab rehta tha
khud se bhi jyada usko -- meri "hifazat" ka khayal rehta tha ..


jo galti karne par kabhi yun daant dia toh karti thi ..
par shaam andhere mein chupp kar,  khud roya fir karti thi ..

 
     woh --- meri  MAA thi ....

 
jisne mujhko chalna sikhaya ,hansana sikhaya
jeeevan dia , vishwaas bhi , usne mujhe jeena sikaya...


jo baba ki bhi himmat thi
chahat hi nahi ikk "aadat" thi ..


      woh --- meri  MAA thi ....

 
jo padiii abhi hai shaant bhavv se ,
"sejj pe antim" --- jeevan ki ...


ankhein kiye hai vo band , dhadkan bhi naaa uski chaltii hai
par rooh se uske abhi bhi -- bus duaaa hi nikla karti haiii ...

 
      woh --- meri  MAA thi ....

 
"thi" nahin vo "hai" abhi bhi  -- aesa ye duniya kehti hai ..
kuch b ho jae par hamesha "MAA" toh "MAA" hi rehti hai ...

                                  ======================
                                         ================

fship day

on frienship day !!!

DEDICATED TO MY FRIENDS:


Moving along the way of life, we have played many parts -- exchanged several roles...
But no story wud have been complete or intresting w/o you..

Partners in mischief ..
...
...shareholders of pain..
...bearers of memories ..
and my co-dreamers !!! :)

Jst wanna reclaim---
No matter how the life changes,
u wud always have a special share in my heart , my memories n my Life!!


Happy F'ship Day to u all :)

Friday, 19 July 2013

मेरा धूप का कोना हो तुम

मेरा  धूप  का कोना  हो तुम 


सब अनजान चेहरों में .. 
मेरी  पहचानी हुई .. 
 रंगों वाली  तसवीर हो  तुम .. 



ज़िन्दगी की इस सैर में ..   
कुछ हसीन  सुबहों  की 
यादगार चाय के ..  मुसाफिर हो तुम ..


मेरे बेवक्त ख्याल , 
 बेतुके सवाल
 सभी का -- "पहला  पड़ाव"  हो तुम 


कुछ भीड़ वाली शामों में  .. 
 भागती मोटर वाली सड़कों पर .. 
मेरा हाथ पकड़ कर उस पार  तक ले जाने  वाला साथ  हो तुम .. 


हर भाव  जिसे दिखाया ..  हर किस्सा उसे  सुनाया ..
अब मेरे जीवन की-  इस कहानी का .. 
सूत्रधार हो  तुम  .. 



हाँ ! रिश्तों की इस  निष्ठुर सर्द  रात  में .. 
मेरा अपना .. 
धूप  का कोना हो  तुम .. 

Lots of Love to the God's beautiful Painting - C.H.I.T.R.A .. 

थोड़ी सी अपनी मासूमियत, उधार दे दो 

ये फलक को छू कर भी,

ज़मीं से जुड़े रहने का फ़न , 

मुझे भी मेरे यार दे दो । । kiss emoticon kiss emoticon


https://www.facebook.com/photo.php?fbid=10152847785582834&set=p.10152847785582834&type=3 

Monday, 24 June 2013

जो घुटता तेरे " अन्दर " है .. उसको बाहर " घटने " दो ...



जो घुटता तेरे " अन्दर " है ..
उसको बाहर " घटने " दो ...
उसको बस  जी भर के  जी लो तुम  , 
 फिर ये दुनिया देखेगी ...



जो दिल में टीस  उठी है ..
आँखों तक ना पहुंची है,
कलम उठा , बांटों ,  एक  बेज़बान कागज़ से .. 
 वो राहत , ना  आंसूं की धार से मिलेगी ..



एक गुंजन  दिल में अगर उठी ...
कोई नयी तमन्ना है जागी  ..
रंग " लाल " सुर्ख अब लगे और भी ,
फिर एक राग  कोई दिल से छेड़ो , ये दुनिया दोहराएगी ..


एक नया जहाँ है कैद  तुझ ही  में ..
जो बिन साँसों के , अफनाता है
एक सांस जोर की यूँ ले लो अब ,
तेरे  संग  सब कुछ " जिंदा" हो जाएगा ..






   ~~~~~

Tuesday, 16 April 2013

कौन हो तुम ?? - Answered !!!


Questions ! 

ना तेरे बिछड़ने का ग़म ही  है ,
ना  तेरे मिलने  की आस ..
पराये भी ना हो सके , ना  रहे  कोई ख़ास   ....


 तुम  हो इक ठहराव , या  यूँही  आया कोई भाव ?
 हो जग  ज़ाहिर एक - कहानी ,  या फिर कोई राज़ ??
 हो मेरी पूरी उड़ान  या मेहेज़ एक आगाज़ ?


हो प्रेम नदी का मदमस्त उफान .. 
या बेकल- सी,   कातर  लहरें, 
टकराती जिनसे  वास्तव की चट्टान  ?


तोड़ते सब्र का ,   कृत्रिम-सा बाँध ..
कल-कल करती ,  हर पल बहती - झीलें - नदिया- झरना तमाम ..
की हो वो अथाह समुन्दर , जिसमें ये सब,  रचते -बसते - भरते हैं प्राण !!!




Answers !

ये जो आती -  है तेरी खुश्बू , या तू  खुद ही एक सुगंध है ?
वो रचती , बसती  मेरे हर ख़याल में ..
तेरी छवि , तेरा ही रंग है ..  !!



एक   गीत  नहीं ,  उन सबका राग   हो  ..
 मेरे मन का  अन्धकार   हर   लेता ..
तमन्ना   का  वो चिराग हो  !!!



वो इक हिस्सा , जिससे मैं पूरी ,
जिसके बिन " किंक्षा "  रहे  अधूरी ...
शायद तुम मेरे वही भाग हो  !!

                                            ~~~~~~  किंक्षा ~~~~~~ 


     

Monday, 8 April 2013

तुम से नहीं कहेंगे , दिल का हाल अब दोबारा !!!

आगोश में  दौड़ के आना तेरा ,
आंसुओं से फिर , दामन भिगाना  मेरा ..

हम   सोचे -  अपना समझ , तूने चुना  था मुझे ,
अच्छा !  तो रोने को ,  मेरा ही  कान्धा मिला था तुझे ???

वादे  बड़े बड़े थे , ना दूर हम रहेंगे ,
रिश्तों की ये अमावस , कैसे भला सहेंगे  !!!

पर्दा उठा भी दो अब,  ये रंगमंच  दिखेंगे ,
सब था  महज़  छलावा , लीला जिसे कहेंगे  !!!

अफ़सोस अब है तुमको , अपना कभी था जाना .. 
रिश्ता जिसे था समझा ,  झूठा सा एक  फ़साना  !!!

  संग  मेरा ना  चाहते थे  , ढूंढते  थे बस सहारा .. 
 तो जाओ !  तुम से  नहीं कहेंगे , दिल का हाल अब  दोबारा  !!!




Tuesday, 2 April 2013

I came too far , yet too Close to YOU !!!!

Every night I keep fighting with myself ,
In a quest to think nothing about you ...
then how do you become my first thought every morning ??


I pretend not to see you when you pass by ,
I do ignore your voice , your existence nearby ...
But how do I stop you, from existing within me ??


I rush to tell you everything that happens, 
but then I hold my steps at your door .. 
and ask myself - Do I really have the right to come to you ??


I fail to think of the ways , you do use, to cope these days .. 
in vain , I just wish , silently pray ..
You don't ever have to live My Life , not even for a day !!


With all my efforts of living without you ...
I just lost Myself, while loosing you ...
In this quest of staying away , I came too far , yet too Close to YOU !!!!


Tuesday, 5 March 2013

"Hell YEah Man !!!! " I am still ALIVE !!!!!!!!



I can raise my voice ..
I have few thoughts and they get some more ..
I still have got the guts,  to say what I feel is right ..
I see things my way,  hell yeah , I trust my sight ...


I still can Love ,  bearing the heart breaks,   ..
I can be through, the wretched wrecks ..
I can get over things, people the most  ..
Life Parties .. yes I can still host ..

I still can feel ..
I still can dream ..
I still can WRITE ..
hence, I am no more STILL...


 I still value past , the experience ..
beyond the trance , I still can believe ..      

 I can speak my heart ..
               "Hell YEah Man !!!! " ... 
                                  I am still ALIVE !!!!!!!!

Friday, 15 February 2013

तूफ़ान बाहर भी था ... तूफ़ान अन्दर भी



तूफ़ान बाहर भी था ...

तूफ़ान अन्दर भी    !!!!


कुछ  शोर बाहर  का था ...

कई  कशमकश , मेरे  मन के अन्दर भी   !!!!

अन्धेरा   ---   बाहर भी पसरा हुआ था  ..

वही  था  मेरे मन के अन्दर भी  !!!!

सपनों में अविश्वास  गहराया था ..

अब था वो  इरादों में भी    !!!!

सूनसान  बाहर से था ...

सन्नाटा मेरे   ज़ीवन   में भी  !!!!

कुछ पिघतला  बाहर भी था  ..

मैं घुलता रहा, अन्दर भी  !!!


बरखा  बाहर  भी  होती   थी  ..

थीं कुछ बूँदें मेरी आँखों में भी  !!!



 आवाज़ आई थी ,जोर से,   कुछ " कांच - सा "  टूटने की    ........

तबाही बाहर भी थी ...
 कुछ बिखरा - सा ,  मेरे अन्दर भी  !!!!   (heart ) 


दोज़ख  ( hell )  के मन्ज़र  "आप ही"  लिखता  रहा    ... ....

" ख़ुदा " ,   बाहर तो  नहीं था ..
न ही  था,  " वो  " , मेरे अन्दर भी  !!!! 

Friday, 25 January 2013

सज़ल नैना .. with सज़ल मुस्कान ...


सज़ल हैं नैना  , फिर भी है मुस्कान ...
 थमीं हैं सांसें, फिर भी तो है जान ..
"फिर मिलेंगे !!"( hold on )पर कब मिलेंगे ??
चलो , टूटे टूटे सब मिलेंगे ...




जितना संग  में जिया है , बस वही पूरा जिया है ...अब जो - रहे तो , (pause)  "कम" जियेंगे ...
थे ख़ुशी के  "संघ-दिल" भी  हम ..
और गम के आंसू संग पिए थे ...
हो सुबह निराश , या वक़्त की दो-पहर ..
तेरे साथ जल  कर ,  गए और निखर ...




राहें पुरानी   अब याद आएं ...
जहाँ हमने " आशियाने "  संग में बनाये ...
वो  बेंतहान ख्वाबों के,  हसीन  "शीश-महल" !!
ताश के पत्तों से " बिखरे", (pause)ये बीते पल ...

कुछ ढूंढ कंकड़ और पत्थर , तेरे साथ जो ये घर बनाया ..
वही घर "कुछ टूटा-हुआ सा ",ख्वाब में मेरे,कई बार आया ..



अनगिनत  बातें जो तेरे साथ की थी ..
अब अकेले में उन्हें, बस याद कर के,  चुप रहेंगे  ..
जो न ये क़यामत सह सके तो बताओ क्या करेंगे  ??
अब दूर रह कर भी .. " तेरी यादों "  में    ही  संग  जियेंगे  ..




पर बिन तेरे ,  " सूना "  रहेगा ..
ज़िन्दगी का ये सफ़र ...
हर  शाख पे ढूंढा करेंगे ...
तुमको ही "सज़ल किंक्षा " के ये स्वर ...
बिन तेरे ये सज़ल डगर ..
सज़ल सपनों का मकान ..
सजे प्रेम से सज़ल नैना ..
बेकल रहेगी ये सज़ल मुस्कान .... 

Wednesday, 23 January 2013

काश .... बिन ढले ही , आज की ये रात रुक जाए !!!!! :-(


यूँ अलविदा कहता "तेरा" --  ये हाथ रुक जाए ..
आँखों से हो रही ये "बरसात रुक जाए
बचे हैं चंद लम्हे  , अब जो भी साथ में तेरे ..

काश .... बिन ढले ही , आज की ये रात रुक जाए !!!!!  :-(




खुलेंगी मेरी आँखें कल सुबह  जब,
साथ ना  होगा -- "तू" मेरे तब ..
तुझे यूँ खामखाँ .. " खो देने का "  मेरा ये "खौफ़ " रुक जाये ....


काश .... बिन ढले ही , आज की ये रात रुक जाए !!!!!  :-(



बिन     हिज्र ( जुदाई) , क्या होती नहीं दास्ताँ कोई पूरी ?
भीगा है "कागज़ " --  थम कई अब ये कलम मेरी ..
कुछ भी दीखता नहीं अब ये  " अश्रु  - धार"  रुक जाए ....
 ( read it as )

तेरा जाना नहीं तो  ना  सही --- मेरी ये सांस रुक जाए  :-(


काश .... बिन ढले ही , आज की ये रात रुक जाए !!!!!  :-(





Tuesday, 8 January 2013

तुम्ही बताओ कहाँ ढुंढ़ू तुम्हें ??




इन बेदर्द  सर्दियों  में ,
कांपती हाथ  की  उँगलियों में  ... 
या बारिशों में कुछ  भीगती-सी उस एक छतरी में .... ?
 


 तुम्ही बताओ कहाँ   ढुंढ़ू   तुम्हें अब इस हाल में  .....  ???




दो प्याली चाय की उन तमाम बेपरवाह चुस्कियों में  .....
मेरे  दिन के हर ख़याल में ,
ज़हन के  हर सवाल में , जवाब में भी ....  ?

 तुम्ही बताओ कहाँ   ढुंढ़ू   तुम्हें अब इस हाल में   .....  ???



कुछ पुरानी तस्वीरों में,
कुछ धुंधलाती हाथ की लकीरों में ..
तन्हाइयों में, बेवक्त आई इन मजबूरियों  में  .... ?

 
 
तुम्ही बताओ कहाँ   ढुंढ़ू   तुम्हें अब इस हाल में  .....  ???

 

 वो हर वक़्त मुझ पर लगे , तेरे पहरे में
तेरे खुद  से भी ज्यादा मेरी परवाह करने में ..
या फिर तेरी शिद्दत में खुदा से हुई  मेरी बेरुखी में ... ?



तुम्ही बताओ कहाँ   ढुंढ़ू   तुम्हें अब इस हाल में  .....  ???


 
 बेवजह मेरे रूठ जाने में ,
तेरे सौ बहाने कर के  मुझे मनाने में,
या अब मेरे बुलाने पे भी  तेरे ना आने में .... ?


तुम्ही बताओ कहाँ   ढुंढ़ू   तुम्हें अब इस हाल में  .....  ???




अब ... मेरी उन अकेली सिसकियों में ... :( 
शायद तूने याद किया , तो मेरी इन  हिचकियों में ...
अब "यादें" बन चुकी, तेरे साथ जो गुजरी उन लमहों,  उन घड़ियों में  ...  ?




तुम्ही बताओ कहाँ   ढुंढ़ू   तुम्हें   ????    :( 



:(