Tuesday, 16 April 2013

कौन हो तुम ?? - Answered !!!


Questions ! 

ना तेरे बिछड़ने का ग़म ही  है ,
ना  तेरे मिलने  की आस ..
पराये भी ना हो सके , ना  रहे  कोई ख़ास   ....


 तुम  हो इक ठहराव , या  यूँही  आया कोई भाव ?
 हो जग  ज़ाहिर एक - कहानी ,  या फिर कोई राज़ ??
 हो मेरी पूरी उड़ान  या मेहेज़ एक आगाज़ ?


हो प्रेम नदी का मदमस्त उफान .. 
या बेकल- सी,   कातर  लहरें, 
टकराती जिनसे  वास्तव की चट्टान  ?


तोड़ते सब्र का ,   कृत्रिम-सा बाँध ..
कल-कल करती ,  हर पल बहती - झीलें - नदिया- झरना तमाम ..
की हो वो अथाह समुन्दर , जिसमें ये सब,  रचते -बसते - भरते हैं प्राण !!!




Answers !

ये जो आती -  है तेरी खुश्बू , या तू  खुद ही एक सुगंध है ?
वो रचती , बसती  मेरे हर ख़याल में ..
तेरी छवि , तेरा ही रंग है ..  !!



एक   गीत  नहीं ,  उन सबका राग   हो  ..
 मेरे मन का  अन्धकार   हर   लेता ..
तमन्ना   का  वो चिराग हो  !!!



वो इक हिस्सा , जिससे मैं पूरी ,
जिसके बिन " किंक्षा "  रहे  अधूरी ...
शायद तुम मेरे वही भाग हो  !!

                                            ~~~~~~  किंक्षा ~~~~~~ 


     

Monday, 8 April 2013

तुम से नहीं कहेंगे , दिल का हाल अब दोबारा !!!

आगोश में  दौड़ के आना तेरा ,
आंसुओं से फिर , दामन भिगाना  मेरा ..

हम   सोचे -  अपना समझ , तूने चुना  था मुझे ,
अच्छा !  तो रोने को ,  मेरा ही  कान्धा मिला था तुझे ???

वादे  बड़े बड़े थे , ना दूर हम रहेंगे ,
रिश्तों की ये अमावस , कैसे भला सहेंगे  !!!

पर्दा उठा भी दो अब,  ये रंगमंच  दिखेंगे ,
सब था  महज़  छलावा , लीला जिसे कहेंगे  !!!

अफ़सोस अब है तुमको , अपना कभी था जाना .. 
रिश्ता जिसे था समझा ,  झूठा सा एक  फ़साना  !!!

  संग  मेरा ना  चाहते थे  , ढूंढते  थे बस सहारा .. 
 तो जाओ !  तुम से  नहीं कहेंगे , दिल का हाल अब  दोबारा  !!!




Tuesday, 2 April 2013

I came too far , yet too Close to YOU !!!!

Every night I keep fighting with myself ,
In a quest to think nothing about you ...
then how do you become my first thought every morning ??


I pretend not to see you when you pass by ,
I do ignore your voice , your existence nearby ...
But how do I stop you, from existing within me ??


I rush to tell you everything that happens, 
but then I hold my steps at your door .. 
and ask myself - Do I really have the right to come to you ??


I fail to think of the ways , you do use, to cope these days .. 
in vain , I just wish , silently pray ..
You don't ever have to live My Life , not even for a day !!


With all my efforts of living without you ...
I just lost Myself, while loosing you ...
In this quest of staying away , I came too far , yet too Close to YOU !!!!