kuch ankahii.....
जब अपनी ही साँसों पर , जीवन भारी होता है .. हर लिखने वाला अपनी ही "कलम " का आभारी होता है ...
Friday, 2 August 2013
'रेहन'
पहले खुद को ही गुम कर के …
अब खुदी को ढूंढ़ते हैं हम …
भाव कौड़ी के , 'रेहन' पे गहने दिए
अब उन्हें ही छुड़ाने चले हैं हम !
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