जो घुटता तेरे " अन्दर " है ..
उसको बाहर " घटने " दो ...
उसको बस जी भर के जी लो तुम ,
फिर ये दुनिया देखेगी ...
जो दिल में टीस उठी है ..
आँखों तक ना पहुंची है,
कलम उठा , बांटों , एक बेज़बान कागज़ से ..
वो राहत , ना आंसूं की धार से मिलेगी ..
एक गुंजन दिल में अगर उठी ...
कोई नयी तमन्ना है जागी ..
रंग " लाल " सुर्ख अब लगे और भी ,
फिर एक राग कोई दिल से छेड़ो , ये दुनिया दोहराएगी ..
एक नया जहाँ है कैद तुझ ही में ..
जो बिन साँसों के , अफनाता है
एक सांस जोर की यूँ ले लो अब ,
तेरे संग सब कुछ " जिंदा" हो जाएगा ..
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