Friday, 25 January 2013

सज़ल नैना .. with सज़ल मुस्कान ...


सज़ल हैं नैना  , फिर भी है मुस्कान ...
 थमीं हैं सांसें, फिर भी तो है जान ..
"फिर मिलेंगे !!"( hold on )पर कब मिलेंगे ??
चलो , टूटे टूटे सब मिलेंगे ...




जितना संग  में जिया है , बस वही पूरा जिया है ...अब जो - रहे तो , (pause)  "कम" जियेंगे ...
थे ख़ुशी के  "संघ-दिल" भी  हम ..
और गम के आंसू संग पिए थे ...
हो सुबह निराश , या वक़्त की दो-पहर ..
तेरे साथ जल  कर ,  गए और निखर ...




राहें पुरानी   अब याद आएं ...
जहाँ हमने " आशियाने "  संग में बनाये ...
वो  बेंतहान ख्वाबों के,  हसीन  "शीश-महल" !!
ताश के पत्तों से " बिखरे", (pause)ये बीते पल ...

कुछ ढूंढ कंकड़ और पत्थर , तेरे साथ जो ये घर बनाया ..
वही घर "कुछ टूटा-हुआ सा ",ख्वाब में मेरे,कई बार आया ..



अनगिनत  बातें जो तेरे साथ की थी ..
अब अकेले में उन्हें, बस याद कर के,  चुप रहेंगे  ..
जो न ये क़यामत सह सके तो बताओ क्या करेंगे  ??
अब दूर रह कर भी .. " तेरी यादों "  में    ही  संग  जियेंगे  ..




पर बिन तेरे ,  " सूना "  रहेगा ..
ज़िन्दगी का ये सफ़र ...
हर  शाख पे ढूंढा करेंगे ...
तुमको ही "सज़ल किंक्षा " के ये स्वर ...
बिन तेरे ये सज़ल डगर ..
सज़ल सपनों का मकान ..
सजे प्रेम से सज़ल नैना ..
बेकल रहेगी ये सज़ल मुस्कान .... 

Wednesday, 23 January 2013

काश .... बिन ढले ही , आज की ये रात रुक जाए !!!!! :-(


यूँ अलविदा कहता "तेरा" --  ये हाथ रुक जाए ..
आँखों से हो रही ये "बरसात रुक जाए
बचे हैं चंद लम्हे  , अब जो भी साथ में तेरे ..

काश .... बिन ढले ही , आज की ये रात रुक जाए !!!!!  :-(




खुलेंगी मेरी आँखें कल सुबह  जब,
साथ ना  होगा -- "तू" मेरे तब ..
तुझे यूँ खामखाँ .. " खो देने का "  मेरा ये "खौफ़ " रुक जाये ....


काश .... बिन ढले ही , आज की ये रात रुक जाए !!!!!  :-(



बिन     हिज्र ( जुदाई) , क्या होती नहीं दास्ताँ कोई पूरी ?
भीगा है "कागज़ " --  थम कई अब ये कलम मेरी ..
कुछ भी दीखता नहीं अब ये  " अश्रु  - धार"  रुक जाए ....
 ( read it as )

तेरा जाना नहीं तो  ना  सही --- मेरी ये सांस रुक जाए  :-(


काश .... बिन ढले ही , आज की ये रात रुक जाए !!!!!  :-(





Tuesday, 8 January 2013

तुम्ही बताओ कहाँ ढुंढ़ू तुम्हें ??




इन बेदर्द  सर्दियों  में ,
कांपती हाथ  की  उँगलियों में  ... 
या बारिशों में कुछ  भीगती-सी उस एक छतरी में .... ?
 


 तुम्ही बताओ कहाँ   ढुंढ़ू   तुम्हें अब इस हाल में  .....  ???




दो प्याली चाय की उन तमाम बेपरवाह चुस्कियों में  .....
मेरे  दिन के हर ख़याल में ,
ज़हन के  हर सवाल में , जवाब में भी ....  ?

 तुम्ही बताओ कहाँ   ढुंढ़ू   तुम्हें अब इस हाल में   .....  ???



कुछ पुरानी तस्वीरों में,
कुछ धुंधलाती हाथ की लकीरों में ..
तन्हाइयों में, बेवक्त आई इन मजबूरियों  में  .... ?

 
 
तुम्ही बताओ कहाँ   ढुंढ़ू   तुम्हें अब इस हाल में  .....  ???

 

 वो हर वक़्त मुझ पर लगे , तेरे पहरे में
तेरे खुद  से भी ज्यादा मेरी परवाह करने में ..
या फिर तेरी शिद्दत में खुदा से हुई  मेरी बेरुखी में ... ?



तुम्ही बताओ कहाँ   ढुंढ़ू   तुम्हें अब इस हाल में  .....  ???


 
 बेवजह मेरे रूठ जाने में ,
तेरे सौ बहाने कर के  मुझे मनाने में,
या अब मेरे बुलाने पे भी  तेरे ना आने में .... ?


तुम्ही बताओ कहाँ   ढुंढ़ू   तुम्हें अब इस हाल में  .....  ???




अब ... मेरी उन अकेली सिसकियों में ... :( 
शायद तूने याद किया , तो मेरी इन  हिचकियों में ...
अब "यादें" बन चुकी, तेरे साथ जो गुजरी उन लमहों,  उन घड़ियों में  ...  ?




तुम्ही बताओ कहाँ   ढुंढ़ू   तुम्हें   ????    :( 



:(