सज़ल हैं नैना , फिर भी है मुस्कान ...
थमीं हैं सांसें, फिर भी तो है जान ..
"फिर मिलेंगे !!"( hold on )पर कब मिलेंगे ??
चलो , टूटे टूटे सब मिलेंगे ...
थे ख़ुशी के "संघ-दिल" भी हम ..
और गम के आंसू संग पिए थे ...
हो सुबह निराश , या वक़्त की दो-पहर ..
तेरे साथ जल कर , गए और निखर ...
राहें पुरानी अब याद आएं ...
जहाँ हमने " आशियाने " संग में बनाये ...
वो बेंतहान ख्वाबों के, हसीन "शीश-महल" !!
ताश के पत्तों से " बिखरे", (pause)ये बीते पल ...
कुछ ढूंढ कंकड़ और पत्थर , तेरे साथ जो ये घर बनाया ..
वही घर "कुछ टूटा-हुआ सा ",ख्वाब में मेरे,कई बार आया ..
अनगिनत बातें जो तेरे साथ की थी ..
अब अकेले में उन्हें, बस याद कर के, चुप रहेंगे ..
जो न ये क़यामत सह सके तो बताओ क्या करेंगे ??
अब दूर रह कर भी .. " तेरी यादों " में ही संग जियेंगे ..
पर बिन तेरे , " सूना " रहेगा ..
ज़िन्दगी का ये सफ़र ...
हर शाख पे ढूंढा करेंगे ...
तुमको ही "सज़ल किंक्षा " के ये स्वर ...
बिन तेरे ये सज़ल डगर ..
सज़ल सपनों का मकान ..
सजे प्रेम से सज़ल नैना ..
बेकल रहेगी ये सज़ल मुस्कान ....