Monday, 8 April 2013

तुम से नहीं कहेंगे , दिल का हाल अब दोबारा !!!

आगोश में  दौड़ के आना तेरा ,
आंसुओं से फिर , दामन भिगाना  मेरा ..

हम   सोचे -  अपना समझ , तूने चुना  था मुझे ,
अच्छा !  तो रोने को ,  मेरा ही  कान्धा मिला था तुझे ???

वादे  बड़े बड़े थे , ना दूर हम रहेंगे ,
रिश्तों की ये अमावस , कैसे भला सहेंगे  !!!

पर्दा उठा भी दो अब,  ये रंगमंच  दिखेंगे ,
सब था  महज़  छलावा , लीला जिसे कहेंगे  !!!

अफ़सोस अब है तुमको , अपना कभी था जाना .. 
रिश्ता जिसे था समझा ,  झूठा सा एक  फ़साना  !!!

  संग  मेरा ना  चाहते थे  , ढूंढते  थे बस सहारा .. 
 तो जाओ !  तुम से  नहीं कहेंगे , दिल का हाल अब  दोबारा  !!!




2 comments:

  1. Adhiktar logon ke saath aisa hi hota hai...... bas kabhi hum ye wala role nibhate hain, kabhi vo wala.

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    1. han .. bt mera side mostly .. yahi rehta hai jo likha hai ...

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