Questions !
ना तेरे बिछड़ने का ग़म ही है ,
ना तेरे मिलने की आस ..
पराये भी ना हो सके , ना रहे कोई ख़ास ....
तुम हो इक ठहराव , या यूँही आया कोई भाव ?
हो जग ज़ाहिर एक - कहानी , या फिर कोई राज़ ??
हो मेरी पूरी उड़ान या मेहेज़ एक आगाज़ ?
हो प्रेम नदी का मदमस्त उफान ..
या बेकल- सी, कातर लहरें,
टकराती जिनसे वास्तव की चट्टान ?
तोड़ते सब्र का , कृत्रिम-सा बाँध ..
कल-कल करती , हर पल बहती - झीलें - नदिया- झरना तमाम ..
की हो वो अथाह समुन्दर , जिसमें ये सब, रचते -बसते - भरते हैं प्राण !!!
Answers !
ये जो आती - है तेरी खुश्बू , या तू खुद ही एक सुगंध है ?
वो रचती , बसती मेरे हर ख़याल में ..
तेरी छवि , तेरा ही रंग है .. !!
एक गीत नहीं , उन सबका राग हो ..
मेरे मन का अन्धकार हर लेता ..
तमन्ना का वो चिराग हो !!!
वो इक हिस्सा , जिससे मैं पूरी ,
जिसके बिन " किंक्षा " रहे अधूरी ...
शायद तुम मेरे वही भाग हो !!
~~~~~~ किंक्षा ~~~~~~
Dukh De Kar Sawaal Kartay ho,
ReplyDeleteTum Bhe GHAALiB ! Kamaal Kartay ho..
Its really a nice one K..touching... U should publish a poetry book of your collections and believe me .. I will be the first one to buy!!!
-Q
Sure ! thanks :)
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