Tuesday, 20 November 2012

भैया -- तुम बिन कैसी दीवाली !!!

भैया  -- तुम बिन कैसी दीवाली   !!!

थे साथ सभी रिश्ते - नाते ,
पर बिन तेरे , था मेरा घर खाली  ....
रह गई  मिठाई धरी हुई,
बस सजी हुई पूजा की थाली ...

भैया  -- तुम बिन कैसी दीवाली   !!!


ना  रॉ केट  आसमान में पहुंचे ,
ना बुलेट डराते थे मम्मी को ...
अनार ,  फुलझड़ी  की  रौशनी में ,
 दिख  जाती -   "आँखों की लाली"  ...

भैया  -- तुम बिन कैसी दीवाली   !!!


थे मिले सभी से हंस कर हम , ( गुरु दरबार में )
बिछडे  संगी , छूटे  साथी  .. ( gudiya di , deepak bhaiya , vishal , shubham , vaishali, vidushi , raja, BK Singh sir , Pushpa aunty )
यूँ तो हँसी - ठहाके बहुत हुए ,
पर नहीं सुनी --  " तेरी हँसी " और ना ही  --- "तेरी ताली " ..

भैया  -- तुम बिन कैसी दीवाली   !!!

तेरे हिस्से के भी दिए , माँ  निकाले  बैठी थी ,
जैसे तेरे आने की अब भी, एक आस जगाये रक्खी थी ..
फिर मायूसी से उसने , सब दिए जलाये एक एक कर के ,
हमको देकर बोली - " जा तू ही  उजियारा कर दे " ..

भैया  -- तुम बिन कैसी दीवाली   !!!

घर तो उजियारा कर दी मैं,
मन उसका न उजाला पाई थी  ...
दीवाली के "कजरौटे" से काजल की वो इक  धार,
जो माँ तेरी आँखों तक पहुंचा ना पाई थी  ...

भैया  -- तुम बिन कैसी दीवाली   !!!

पूजा बीती जैसे - तैसे , सब खाने को थे बैठे जब ...
बच गई थी पूडी  की  गोली, और कड़ाही में भी घी ..  ( हमेशा  तुम खूब सारी  पूड़ियाँ खाते थे ... याद है)
कुछ छीटे तेल के  पड़  गए थे , माँ के बाएँ हाथ पर,
शायद कुछ बूँदें " ममता के आंसू की " , जा मिली  थी कड़ाही के -- गरम तेल में ..

भैया  -- तुम बिन कैसी दीवाली   !!!


पापा भी सब देख रहे थे, पर बोलना उन्हें भी ना आया,
हमने बोला " घर से ज्यादा"  सँघ  " यारों का " तुमको भाया ...
तभी सिसक रज़ाई में ---  माँ बोली   :
" जाने मेरे बेटे ने आज क्या खाया " ...        ( thats all she was worried abt )

भैया  -- तुम बिन कैसी दीवाली   !!!

गर लिख पाती मेरे जैसा,
तो पंख लगा के उड़ आती,
तेरे पास लिए खाने  की  थाली,
और कहती, लेकर अश्रु , "मातृत्व - विकल"  आँखों से ...

" बेटा  ----  तुम बिन कैसी दीवाली "   !!!!
" तुम बिन कैसी दीवाली "   !!!!

2 comments:

  1. waise to mujhe poem samjh nahi aati dost...magar ye bhaiya bin kaisi diwaali....gazab hai..story was flashing like a picture whicle reading...gr8! keep it up :)

    _rahul

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    1. hahha .. i know dost .. bt ye " maa - betey" wali feeling har living creature ko samajh aaaati hai :)

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